पृथ्वी की कक्षा और घूर्णन समय

पृथ्वी स्वयं की ही धुरी पर 23.5 डिग्री झुकी हुई है. सूरज के चारो तरफ चक्कर लगाते हुए भी धरती का इसी तरह अपनी अक्ष पर झुकाव रहता है. पृथ्वी के इसी झुकाव के रहते ही मौसम में बदलाव आते है. साल भर में एक समय धरती का उत्तरी गोलार्ध सूरज की ओर झुका हुआ रहता है. और दक्षिणी गोलार्ध की दूरी भी सूर्य से काफी होती है. इस समय उत्तरी गोलार्ध में सूर्य प्रकाश बहुत अधिक पहुँचने पर यहाँ पर ग्रीष्म काल होता है. दक्षिणी गोलार्ध में सूर्य की किरणे तिरछी पड़ने की वजह से यहाँ पर तापमान कम रहता है. शीत ऋतु भी इस वजह से इस समय दक्षिणी गोलार्ध में पड़ने लगती है. ठीक महीने के बाद यह स्थिति पूरी उल्टी हो जाती है. वसंत ऋतु के समय दोनों गोलार्द्धों में लगभग समान सूर्यप्रकाश पाता है.